Dear Future Husband

Dear future husbandकुछ बात करनी थी आपसेदिल के हालत कुछ ख़ास नहीं है और तुम्हारे भी निशा आस पास नहीं हैपहले ये बताओ कहा हो कैसे हो अल्लाह रहम-ए-करम बस सब अच्छे होंतुमसे दूर रहने पे बड़ी तड़पती हु मैं तुम्हारे ख्वाबो में यूँ ही गुजरती हु मैंपर आजकल तो हद्दे पार कर दी हैं... Continue Reading →

अल्लाह

तेरी खिदमत में ओह !! अल्लाह न जाने कितने आये होंगे भर दी झोली सबकी न खाली लौटाए होंगे तो बता मोन क्यों है तू मेरी जुदाई पे क्या मेरी इबादत तेरे तक न आई होगी हो सकता नासमज हु की होगी गलती हज़ारों मेरी खिदमत तुझे नहीं पसंद आई होगी तू जानता है मानता... Continue Reading →

शहिद

भारत माता को जब लुटा था सबका सपना टुटा था तब सुना किसी ने जाना था एक नौजवान को आना था जो ना डरता था मरने से ना ही फांसी ना तख्ते से वो हिमतवाला नाज हमे देश का सरताज है जो वो क्यों पल पल फिर टूट गया क्यों ना हमने फिर साथ दिया... Continue Reading →

जो नजरें झुका के चलते हैं

जो नजरें झुका के चलते हैं हम गली माहौल में समझ ना लेना फिर से कशूर कर के निकले हैं जो आम से तूम आप मे बदलना सीखोगे हम लफ्जो को होठों में क़ैद करना छोड़ेगे दिल तोड़ते जो सच्ची महोबत रखने वालो का हम उनके लिए गहन राज छुपा के निकले है जो नजरें... Continue Reading →

सवाल

उनका सवाल जो सवालो से था परे जवाब जो डुंडे तो हम बवाल मच गया दिन रात जो करते रहे वादे हजारों भीं वो झूठा एक ख्याल था जो सवाल बन गया जो आँखों वो चुराने लगे मेरे दुनिया से दिल टूट जाता पल पल धड़क तेरे दर्मिया ये तू साज है सवेरा है घनघोर... Continue Reading →

कलम उठा जो हाथों में तो ज़िंदगानी पे भी लिखेंगे  

कलम उठा जो हाथों में तो ज़िंदगानी पे भी लिखेंगे रूह तड़पती तुझ बिन जानम इस दीवानी पे भी लिखेंगे कुछ पल जो लम्हा था ठहरा आँखों में सदमा था गहरा पल पल तेरे पे मेरा मरना मेरे ख़यालो में तेरा बनन्ना आँखों से झलके उस हर अक्ष की रुसवाई पे भी लिखेंगे बेफवाई पे... Continue Reading →

इश्क़ राहो पे

अब क्यो सोचता है चल पड़ा जो इश्क़ राहो पे पैगाम ही बुरा यहां तो अंजाम क्या होगा मुसाफिर बना जो पल पल को यु बदनाम हो गया सोच ही बुरा तो यहां अख़लाक़ क्या होगा यहां भीड़ है लोगों की सब इश्क़ में पागल पागल बने लोगों में तेरा नाम क्या होगा ख्वाबो के... Continue Reading →

यकीन

हालत जो बदलने लगे हैं मेरे देश समाज में आज अपनों को ही अपनों पे भरोशा नहीं रहा आज कल आँखे भी साथ मेरा नहीं देती जो रोज रोज उन पर ये गम सितम डहा रहा ताउम्र साथ जीने मरने के किये थे जो वादे उन वादों का जानम कोई वजूद न रहा जीना भी... Continue Reading →

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